सूर्य के प्रचंड तापमान वाले वातावरण को टटोलने और इस तारे तक मानवों के
पहले मिशन के उद्देश्य से डेढ अरब डॉलर के नासा के अंतरिक्षयान के
प्रक्षेपण की आज उल्टी गिनती शुरू हुई।
कार के आकार का अंतरिक्षयान 'पारकर सोलर प्रोब कल तड़के फ्लोरिडा के केप केनवरल से डेल्टा 4 हैवी राकेट के साथ प्रक्षेपित किया जाना है। नासा ने कहा कि प्रक्षेपण स्थानीय समयानुसार सुबह तीन बजकर 33 मिनट पर शुरू होगा और मौसम पूर्वानुमान 70 प्रतिशत प्रक्षेपण के पक्ष में है।
इस यान का मुख्य लक्ष्य सूर्य की सतह के आसपास के असामान्य वातावरण के गूढ रहस्यों का पता लगाना है। सूर्य की सतह के ऊपर का क्षेत्र (कोरोना) का तापमान सूर्य की सतह के तापमान से करीब 300 गुना ज्यादा है।
मिशीगन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और परियोजना वैज्ञानिकों में शामिल जस्टिन कास्पर ने कहा, ''पारकर सोलर प्रोब हमें इस बारे में पूर्वानुमान लगाने में बेहतर मदद करेगा कि सौर हवाओं में विचलन कब पृथ्वी को प्रभावित कर सकता है।
इस यान को केवल साढे चार इंच (11.43 सेंटीमीटर)मोटी ऊष्मा रोधी शील्ड से सुरक्षित किया गया है जो इसे सूर्य के तापमान से बचाएगी।
सावन महीने की शनिवारी अमास्या यानी कल 11 अगस्त 2018 को इस साल का आखिरी ग्रहण पड़ेगा। भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा जिससे इसका यहां कोई खास असर नहीं होगा। टाइम एंड डेट डॉट कॉम वेबसाइट के मुताबिक यह भारतीय समयानुसार सूर्य ग्रहण शनिवार को दोपहर 01:32:08 बजे शुरू होगा। दोपहर करीब 03:16:24 मिनट पर ग्रहण का मध्य यानी अधिकतम ग्रहण होगा और शाम 5 बजे यह समाप्त हो जाएगा। इस बार सूर्य ग्रहण 3 घंटे 30 मिनट तक होगा।
जानें ग्रहण से जुड़ी 10 मान्यताएं-
1- मान्यता है कि राहु और केतु नाम का दानव सूर्य और चंद्रमा का दुश्मन है। जब राहु सूर्य को ग्रस लेता है तो सूर्य ग्रहण पड़ता है और जब चंद्रमा को ग्रसता है तो चंद्र ग्रहण पड़ता है।
2- कहा जाता है कि राहु और केतु नाम के दानव कोई आकार या अस्तित्व नहीं है। यह एक छाया ग्रह है। सूर्य और चंद्रमा से राहु की दुश्मनी तब से है जब भगवान विष्णु ने समुद्र मंथन के दौरान छल से अमृत पी रहे राक्षस का सिर सुदर्शन से काट दिया था। सिर वाले भाग को राहु और धड़ को केतु नाम से जानते हैं। राहु और केतु के छल को सूर्य और चंद्रमा ने देख लिया था और उन्होंने ही भगवान विष्णु को जानकारी दी थी।
3- ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बीमार लोगों को घर के बाहर नहीं निकलना चाहिए। कहा जाता है कि ऐसा न करने वाले पर बुरा असर होता है।
4- ग्रहण को नंगी आंख से नहीं देखना चाहिए क्योंकि इससे आंखों की रोशनी प्रभावित हो सकती है।
5- मंदिर या पूजा घर को बंद कर देना चाहिए। ग्रहण के दौरा पूजा नहीं करना चाहिए।
6- ग्रहण के बाद स्नान करके और देवताओं को गंगाजल से पवित्र करके उनकी पूजा करना चाहिए।
7- ग्रहण के वक्त किसी को खाना नहीं खाना चाहिए और न ही पति पत्नी को एक साथ सोना चाहिए।
8- मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के दौरान सिलाई-बुनाई करना या चाकू, छुरी जैसी धारदार चीज का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
9- मान्यता है कि ग्रहण के दौरान भगवान का नाम लेने या भगवान का ध्यान करने के अलावा कोई दूसरा काम नहीं करना चाहिए।
10- ग्रहण के वक्त पवित्र नदियों जलाशयों में स्नान करने से बहुत ही पुण्य होता है। लेकिन स्नान करने के दौरान कोई मंत्र नहीं बोलना चाहिए। ग्रहण
कार के आकार का अंतरिक्षयान 'पारकर सोलर प्रोब कल तड़के फ्लोरिडा के केप केनवरल से डेल्टा 4 हैवी राकेट के साथ प्रक्षेपित किया जाना है। नासा ने कहा कि प्रक्षेपण स्थानीय समयानुसार सुबह तीन बजकर 33 मिनट पर शुरू होगा और मौसम पूर्वानुमान 70 प्रतिशत प्रक्षेपण के पक्ष में है।
इस यान का मुख्य लक्ष्य सूर्य की सतह के आसपास के असामान्य वातावरण के गूढ रहस्यों का पता लगाना है। सूर्य की सतह के ऊपर का क्षेत्र (कोरोना) का तापमान सूर्य की सतह के तापमान से करीब 300 गुना ज्यादा है।
मिशीगन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और परियोजना वैज्ञानिकों में शामिल जस्टिन कास्पर ने कहा, ''पारकर सोलर प्रोब हमें इस बारे में पूर्वानुमान लगाने में बेहतर मदद करेगा कि सौर हवाओं में विचलन कब पृथ्वी को प्रभावित कर सकता है।
इस यान को केवल साढे चार इंच (11.43 सेंटीमीटर)मोटी ऊष्मा रोधी शील्ड से सुरक्षित किया गया है जो इसे सूर्य के तापमान से बचाएगी।
सावन महीने की शनिवारी अमास्या यानी कल 11 अगस्त 2018 को इस साल का आखिरी ग्रहण पड़ेगा। भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा जिससे इसका यहां कोई खास असर नहीं होगा। टाइम एंड डेट डॉट कॉम वेबसाइट के मुताबिक यह भारतीय समयानुसार सूर्य ग्रहण शनिवार को दोपहर 01:32:08 बजे शुरू होगा। दोपहर करीब 03:16:24 मिनट पर ग्रहण का मध्य यानी अधिकतम ग्रहण होगा और शाम 5 बजे यह समाप्त हो जाएगा। इस बार सूर्य ग्रहण 3 घंटे 30 मिनट तक होगा।
जानें ग्रहण से जुड़ी 10 मान्यताएं-
1- मान्यता है कि राहु और केतु नाम का दानव सूर्य और चंद्रमा का दुश्मन है। जब राहु सूर्य को ग्रस लेता है तो सूर्य ग्रहण पड़ता है और जब चंद्रमा को ग्रसता है तो चंद्र ग्रहण पड़ता है।
2- कहा जाता है कि राहु और केतु नाम के दानव कोई आकार या अस्तित्व नहीं है। यह एक छाया ग्रह है। सूर्य और चंद्रमा से राहु की दुश्मनी तब से है जब भगवान विष्णु ने समुद्र मंथन के दौरान छल से अमृत पी रहे राक्षस का सिर सुदर्शन से काट दिया था। सिर वाले भाग को राहु और धड़ को केतु नाम से जानते हैं। राहु और केतु के छल को सूर्य और चंद्रमा ने देख लिया था और उन्होंने ही भगवान विष्णु को जानकारी दी थी।
3- ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बीमार लोगों को घर के बाहर नहीं निकलना चाहिए। कहा जाता है कि ऐसा न करने वाले पर बुरा असर होता है।
4- ग्रहण को नंगी आंख से नहीं देखना चाहिए क्योंकि इससे आंखों की रोशनी प्रभावित हो सकती है।
5- मंदिर या पूजा घर को बंद कर देना चाहिए। ग्रहण के दौरा पूजा नहीं करना चाहिए।
6- ग्रहण के बाद स्नान करके और देवताओं को गंगाजल से पवित्र करके उनकी पूजा करना चाहिए।
7- ग्रहण के वक्त किसी को खाना नहीं खाना चाहिए और न ही पति पत्नी को एक साथ सोना चाहिए।
8- मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के दौरान सिलाई-बुनाई करना या चाकू, छुरी जैसी धारदार चीज का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
9- मान्यता है कि ग्रहण के दौरान भगवान का नाम लेने या भगवान का ध्यान करने के अलावा कोई दूसरा काम नहीं करना चाहिए।
10- ग्रहण के वक्त पवित्र नदियों जलाशयों में स्नान करने से बहुत ही पुण्य होता है। लेकिन स्नान करने के दौरान कोई मंत्र नहीं बोलना चाहिए। ग्रहण
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