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Showing posts from September, 2018

डोनल्ड ट्रंप को आशंका, रूस के बाद अब चीन कर सकता है चुनावों में दख़लअंदाज़ी

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा है कि चीन अमरीका के आगामी मध्यावधि चुनावों को प्रभावित करना चाहता है. यह बात उन्होंने न्यूयॉर्क में सं युक्त राष्ट्र सु रक्षा परिषद की एक बैठक में दुनिया के कई बड़े नेताओं के सामने कही. ट्रंप ने कहा, "वो नहीं चाहते कि मैं जीतूं क्योंकि मैं पहला अम रीकी राष्ट्रपति हूं जिस ने उन्हें व्यापार के मुद्दे पर चुनौती दी है." हालांकि, ट्रंप ने अपने आरोपों को पुष्ट करने के लिए कोई सबूत नहीं दिया. अ मरीका और चीन के बीच व्यापा र शुल्क को लेकर विवाद तब से चल रहा है जब से डोनल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति का कार्यभार संभाला है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक परमाणु, रायायनिक और जैविक हथियारों पर रोक लगाने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए आयोजित की गई थी लेकिन ट्रंप ने इस मौके पर चीन को निशाना बना लिया. उन्होंने कहा, "ये दुख की बात है कि चीन नवंबर में होने वाले हमारे आगामी चुनाव में मेरे ख़िलाफ़ दख़ल देने की कोशिश कर रहा है.'' ट्रंप ने कहा, "वह नहीं चाहते कि मैं जी तूं, वो नहीं चाहते कि हम जीतें क्योंकि मैं ऐसा पहला राष्ट्र...

“零日”水荒擦肩而过,开普敦为全球敲响警钟

按照预估,开普敦原本会在 2018年4月 12日迎来水荒,370万居民将陷入无水可用的窘境。 然而,通过大幅削减市政用水,同时紧急调配农业用水,这场水资源“零日”危机最终侥幸得以避免。但是,这是一个痛苦和有失公平的过程,引发了不少争议。 开普敦成功延缓了水资源“零日”危机的到来,但是这是否意味着开普敦水资源系统具备足够的能力应对“水荒”呢? 我们不这样认为。 这可能预示着开普敦以外地区会面临 着更大的麻烦。 包括加拿大各城市在内的北半球城市都已进入夏季,创纪录高温、干旱和径流增加导致的洪水泛滥接踵而至。 水资源危机不仅仅只 是稀缺问题 水资源短缺危机往往是管理不善造成的,而不是自然水资源供应的绝对减少。 降水量低于平均水平是造成开普敦本次水“危机”的决定性因素,但是监管部门行动迟缓、应对不足则让情况进一步恶化。应该由谁来负责采取行动,以及何时采取行动这个问题我们姑且不谈,我们认为,更大的问题在于人们依然在用过 时的思维方式看待 水资源系统的“不确定性”。 2016年,开普敦干旱加剧,但该市的水务管理者们却仍然自信满满,认为自己的供水系统能够抵御这场自然灾害。高层工程技术和管理人员认为,开普敦的供水系统在对抗严重干旱方面有着独一无二的优势,其中一部分原因在于他们大张旗鼓宣传的用水需求管理战略已经取得了成功。 他们说的的确有一定道理 ——2016年 后,通过需求侧管理,开普敦日均水资源消耗量已经下降了50%。那么问题到底出在哪里呢? 需求管理的局限性 首先,如今全球降雨模式不确定性逐步增加,这也是全球多个城市面临的一个严峻挑战,但是开普敦的水资源管理方法并不能很好地应对这 个问题。开普 敦大学的研究人员最近指出,一直以来采用的传统供需预测模型低估了水资源系统失效的可能性。 其次,开普敦的供水系统其实已经几近崩溃,因为需求侧管理似乎已经达到了极限。从去年下半年开始,开普敦规定每人每天用水量不得超过87公升。之后,这一上限又下降到了每人每天50公升尽管 做出了上述努力 ,但是开普敦始终未能将全市日均用水量控制在5亿公升之下,而这个数字是保证该市水资源系统能够在下一个雨季来临之前正常运转的最低标准。 市长指责市民浪费水资源,但是她的谴责并不能说明居民们不守规定。不断缩减的限水目标其实是一项难以为继的长期管理战略。 缓冲策...

नज़रिया: अनुशासन की बात करके लोकतंत्र कमज़ोर होता है?

रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को दिल्ली में उ प-राष्ट्रपति वेंकैया नायडू की किताब 'मूविंग ऑन मूविंग फॉरवर्ड: ए इयर इन ऑफ़िस' का लोकार्पण किया. इस दौरान दिए अपने भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इन दिनों अनुशासन को 'निरंकुशता' करार दे दिया जाता है. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, पुस्तक का विमोचन करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ''वैंकेया जी अनुशासन के प्रति बहुत आग्रही हैं और हमारे देश की स्थिति ऐसी है कि अनुशासन को अलोकतांत्रिक कह देना आजकल सरल हो गया है.'' प्रधानमंत्री ने कहा, ''अगर कोई अनुशासन का ज़रा सा भी आग्रह करे तो उसे निरंकुश बता दिया जाता है. लोग इसे कुछ नाम देने के लिये शब्दकोष खोलकर बैठ जाते हैं.'' प्रधानमंत्री द्वारा अनुशासन की बात कहने के क्या अर्थ हैं? और अगर कोई सरकार अनुशासन में रहने की बात कहती है तो क्या वह असहमति को दबा रही होती है? यही सब सवाल बीबीसी संवाददाता संदीप सोनी ने वरिष्ठ पत्रकार एच.के. दुआ से पूछे. अगर कोई स्कूल टीचर अपनी क्लास में अनुशासन की बात करता है तो वह दूसरी बात ह...